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Showing posts from September, 2019
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                          पाकिस्तान का समाधान                                                                 ( लेख- दीपक कुमार दूबे)                          शीर्षक की तरह निश्चित ही यह आसान नहीं है। प्रत्येक देश या व्यक्ति से यह आशा की जाती है कि वह अपने इतिहास से या अपने पूर्व कृत्यों से कुछ न कुछ सीख ले परंतु, 1947,1965,1971,1999 में चार बार युद्ध में हार का सामना करने के बाद भी पाकिस्तान के इतिहासकार इसे उनकी जीत बना कर प्रचारित करते हैं और पुनः युद्धोन्माद का निरंतर सृजन कर रहे हैं।         पाकिस्तान सेना के मुताबिक वे भारत के साथ 25 दिन तक युद्ध के लिए सक्षम हैं परंतु उनकी अर्थव्यवस्था को यदि मिला दिया जाए तो $17 billion से  वो चंद दिनों तक भी युद्ध करने की स्थ...
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           💐🙏 सैन्य कार्यवाई के सबूत 💐🙏 (written by Deepak Dubey)  प्रो. अमर्त्य ने सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक अधिकारों के अतिक्रमण को झेलने की विवशता को गरीबी कहा है। संभवतः कुछ ऐसी ही स्थिति आज इमरान खान की है। संदेहास्पद लोकतंत्र के प्रधानमंत्री को सेना की कठपुतली तो माना ही जाता रहा है वैश्विक बिरादरी ने भी उनके राजनीतिक, आर्थिक अधिकारों का अतिक्रमण शुरू कर दिया जहां एक तरफ FATF(Financial action task force) नें उसे ग्रे लिस्ट में रखा है वहीं इस्लामिक देश भी उससे किनारा करते नजर आने लगे है। सामाजिक पतन के जिम्मदार तो वह स्वयं है।           पुलवामा हमले के बाद उत्पन्न तनाव के बाद भारत ने सीमापार पाकिस्तान के बालाकोट स्थित आतंकी प्रतिष्ठानों पर मिराज विमानों के द्वारा बमबारी करके इसे आतंकवाद के विरुद्ध कठोर कार्यवाई के रूप में प्रचारित किया। इस आक्रमक कार्यवाई के बावजूद भारत अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को यह मनवाने में भी सफल रहा कि भारत की यह कार्यवाई पाकिस्तान के विरुद्ध न होकर आतंकवाद के विरुद्ध है। हमले से तिलमिलाए...