भारत सरकार ने वर्ष 2018 को “राष्ट्रीय मोटा अनाज वर्ष” (National Year of the Millet) घोषित किया है। भारतीय संदर्भ में इसकी आवश्यकता एवं उपयोगिता पर प्रकाश डालिये।(200 शब्द)

भारत की अधिकांश जनसंख्या के निम्न आय वर्ग में होने के कारण यहां पर कुपोषण की समस्या काफी विकट है जिसे दूर करने के लिए केन्द्र और राज्य सरकारें अपने स्तर पर प्रयास करती रही हैं, परंतु सीमित संसाधनों व विकासशील देश होने के कारण इस पर अभी पूरी तरह काबू नहीं पाया जा सका है, सरकार इसके लिए गरीबों को PDS के माध्यम से अनाज उपलब्ध करा रही है, इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए सरकार ने पीडी-एस के माध्यम से निम्न और मध्यम आय वर्गों को मोटा अनाज प्रदान करने की कोशिश 
कर रही है, पहले से तमिलनाडू जैसे राज्य मोटा अनाज प्रदान करते रहे हैंमोटे अनाजों में खनिज तत्व गेहूं व चावल की तुलना में भरपूर मात्रा में पाया जाता हैं, इसके साथ ही ये अनाज शुष्क एवं अर्ध शुष्क स्थानों पर भी उगाए जा सकते हैं,भारत में निम्म व मध्यम आय वर्ग की समस्या कैलोरी के बजाए खनिज तत्वों की है। मोटे अनाज में पोषक तत्वों की भरपूर मात्रा होने के कारण यह भारत में कुपोषण की समस्या का समाधान हो सकता है,
कम वर्षा वाले क्षेत्रों में यह किसानों की आय को बढ़ाने का एक विकल्प हो सकता है। भारत सरकार ने इसके लिए वर्ष 2018 को “राष्ट्रीय मोटा अनाज” वर्ष घोषित किया गया है।


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